सोमवार, 26 मार्च 2012

विशुद्ध एकेश्‍वरवाद


तआलो इला कलिमतिन सवाइन बे नना वबे नकुम’ (कुरआन सूरह आले इमरान आयत नं0 64)
(तर्जुमा) ऐ दुनिया के लोगो! आओ एक ऐसे कलिमे की तरफ़ जो हमारे और तुम्‍हारे दरमियान मुशतरक (संयुक्‍त) है.
ऐ इसराईल के बेटो!
तुम्‍हारा ईमान है कि हजरत उज़ैर अलैहिस्‍सलाम अल्‍लाह के बेट थे और यह भी तस्‍लीम करते हो कि उन्‍हें मौत आई. कभी तुमने गौर किया कि अल्‍लाह की जात ‘’हई और कइयूम है’’ है और उसके बेटे में यह भी यह सिफ़ात (विशेषता) होनी चाहिए थी, तो फिर हजरत उज़ैर अलैहिस्‍सलाम को मौत क्‍यों आई? जिसे मौत आये वह अल्‍लाह का बेटा कैसे हो सकता है?

ऐ ईसा इब्‍न मरियम अलैहिस्‍सलाम के हवारियो! 
तुम्‍हारा ईमान है कि हज़रत ईसा इलैहिस्‍सलाम अल्‍लाह के बेटे हैं और यह भी तस्‍लीम करते हो कि हज़रत ईसा अलैहिस्‍सलाम सूली दिये गये, कभी तुमने ग़ौर किया कि अल्‍लाह तो ज़बरदस्‍त क़ुव्‍वत वाला और हर एक पर ग़ालिब है फिर उसका बेटा इतना कमज़ोर और बेबस क्‍यों था कि सूली पर चढ़ा दिया गया, जो सूली पर चढ़ा दिया गया, वह खुदा का बेटा कैसे हो सकता है?

ऐ हिन्‍दू मत के पैरोकारो!
तुम्‍हारा ईमान है कि दुनिया में 33 करोड़ भगवान हैं, हर आदमी अपना अपना भगवान अलग रखता है गोया हर आदमी का अपना भगवान है जो उसकी हाजतें और मुरादें पूरी करने पर क़ादिर (सामर्थ्‍यवान) है जबकि बाक़ी 32 करोड 99 लाख 99 हज़ार 9सौ99 भगवान उसकी ज़रूरतें पूरी करने से आजिज़ (असमर्थ) हैं, कभी आपने ग़ौर किया कि अगर 32 करोड़ 99 लाख 99 हज़ार 9सौ99 भगवान आजिज़ और बेबस हैं तो फिर उन्‍हीं में से एक भगवान हाजतें और मुरादें पूरी करने पर कैसे क़ादिर (सामर्थ्‍य) हो सकता है?

ऐ बुद्ध मत के मानने वालो!
तुम्‍हारा ईमान है कि गौतम बुद्ध आलमगीर (विश्‍वव्‍यापी) सच्‍चाई की तलाश में बर्षो वर्ष मैदानों, जंगलों और सहराओं में फिरते रहे, तुमने कभी ग़ौर किया कि जो शख्स खुद एक आलमगीर सच्‍चाई की तलाश में एक लम्‍बी मुद्दत (अबधि) तक सरगर्दां रहा़ वह खुद आलमगीर सच्‍चाई कैसे बन सकता है?

ऐ इमामों के मानने वालो!
तुम्‍हारा ईमान है कि कायनात का ज़र्रा ज़र्रा इमाम के हुकुम व इक़्तिदार के आगे सर नगू है और यह दावा भी रखते हो कि अहले बैत पर जो मुसीबत और आफ़त आई वह अबू बक्र रजिअल्‍लाहु अन्‍हु और उमर रजिअल्‍लाहु अन्‍हु की वजह से आई कभी तुमने ग़ौर किया कि जिसके हुकुम के आगे कायनात का ज़र्रा ज़र्रा सर नगू हो उस पर आफ़त और मुसीबत कैसे आ सकती है? और जिस पर आफत और मुसीबत आ जाये वह कायनात के ज़र्रे ज़र्रे का हाकिम और मक्तदरे आला कैसे बन सकता है?

ऐ बुजुरगाने दीने और औलिया-ए-किराम के मानने वालो!
तुम्‍हारा ईमान है कि अली हजवेरी रहमतुल्‍लाह अलैहि ख़ज़ाने अता करते हैं. ख्‍वाजा मुईनुद्दीन चिश्‍ती रहमतुल्‍लाह अलैहि तूफ़ानो से निजात बख्‍शते हैं. अब्‍दूल क़ादिर जीलानी रहमतुल्‍लाह मुसीबतों और मुश्किलात दूर करते है, इमाम बरी रहमतुल्‍लाह खोटी किस्‍मतें खरी करते हैं और सुल्‍तान बाहू रहमतुल्‍लाह औलाद से नवाज़ते है. कभी तुमने ग़ौर किया जब अली हजवेरी रहमतुल्‍लाह नहीं थे तो ख़जाने कौन अता करता था जब मुईनुद्दीन चिश्‍ती रहमतुल्‍लाह नहीं थे तो तूफ़ानों से निजात कौन बख्‍शता था, जब अब्‍दूर क़ादिर जीलानी रहमतुल्‍लाह नहीं थे तो मसाइब और मुश्किलात कौन दूर करता था जब इमाम बरी रहमतुल्‍लाह नहीं थे तो खोटी किस्‍मतें कौन खरी करता था, जब सुल्‍तान बाहू रहमतुल्‍लाह नहीं थे तो औलाद कौन देता था?

ऐ दुनिया के लोगो!
मेरी बात ज़रा ग़ौर से सुनो !
जिसकी शिक्षाओं में कोई विरोधावास नहीं.
जो समस्‍त मानव जाति की रूह को आसूदगी (आत्‍मा तृप्‍त करता) और जिस्‍म को आज़ादी बख्‍शता (प्रदान करता) है.
 जो समस्‍त मानव जाति को अहतराम, इज्‍़ज़त और अज़मत अता करता है.
 जो समस्‍त मानव जाति को अम्‍न व सलामती, अदल व इंसाफ़, समानता व स्‍वतंत्रता, भाईचारा व मुहब्‍बत जैसी आला अक़दार की ज़मानत देता है.
 जो समस्‍त मानव जाति को जहन्‍नम की आग से निजात दिलाता है.
 वह एक कलिमा है-------‘’ला इलाह इल्‍लल्‍लाह’’ यानी अल्‍लाह के सिवा कोई इलाह (पूज्‍य) नहीं.
स्रोत- तौहीद के मसाइल (उर्दू) से रूपान्‍तरित
लेखक- मुहम्‍मद इक़बाल कीलानी, प्रकाशक- दारूल कुतुब इस्‍लामिया दिल्‍ली.          
         
ऐसी मूर्तियों की पूजा भला क्या करनी जो न किसी की पुकार-प्रार्थना सुन सकती हों, न कोई लाभ-हानि पहुंचा सकती हों; सिर्फ़ इसलिए कि बाप-दादा ऐसा ही करते आए हैं? अस्ल में पूरे संसार का प्रभु तो वह (ईश्वर) है जो इन्सान को पैदा करता, मार्गदर्शन करता, खिलाता-पिलाता, बीमार हो जाने पर, स्वास्थ्य देता, और मौत देता है और फिर दोबारा (पारलौकिक) जीवन वही प्रदान करेगा। (सार, 26:72-81) अल्लाह ईश्वर के अलावा जिनकी भी पूजा की जाती है वे रोज़ी (आजीविका) देने का सामर्थ्य नहीं रखते। उसी से रोज़ी मांगो, उसी की बन्दगी करो, उसी के कृतज्ञ बनकर रहो। (मृत्यु पश्चात्) उसी की ओर पलटकर (परलोक में) जाने वाले हो। (कुरआन भावार्थ, 29:17)

विशुद्ध एकेश्वरवाद के तर्क का एक उदाहरण: जब तुम अपने दासों (नौकरों, सेवकों आदि) को अपने स्वामीत्व में, अपने माल-दौलत में, अपने अधिकारों में शरीक होना पसन्द और बर्दाश्त नहीं करते तो फिर ईश्वर के प्रभुत्व, स्वामित्व व अधिकारों में दूसरों को साझी व समकक्ष क्यों बनाते हो? (कुरआन भावार्थ, 30:28)

जिसने अल्लाह का सहारा थामा उसने ऐसा मज़बूत सहारा थाम लिया जो कभी टूटने वाला नहीं है। वह सब कुछ सुनने वाला, जानने वाला है। (कुरआन भावार्थ, 2:256)

http://www.youtube.com/watch?v=bIbOvi-m_-M&feature=related 

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